<?xml version="1.0" encoding="utf-8" ?> 
<rss version="2.0" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" > 
<channel>
<title>beheshtnet [ PARSIBOX.COM ]</title>
<language>fa</language>
<generator>beheshtnet [ PARSIBOX.COM ]</generator>
<description>beheshtnet [ شبکه ی خدمات مجازی پارسی باکس ]</description>
<link>http://beheshtnet.parsibox.com</link>
<item>
<title>استفتائات مراجع در مرگ مغزى (1)</title>
<description>&amp;nbsp; &lt;p style=&quot;line-height: 150%; text-align: center&quot; dir=&quot;rtl&quot; align=&quot;center&quot;&gt;استفتائات مراجع در مرگ مغزى (1)&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;1. امام خمینى&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;پس از عرض سلام با کمال احترام به عرض مى رساند: &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : امروز در دنیا مسئله مرگ مغزى پذیرفته شده است و در صورتى که در فردى با کمک معاینات و آزمایشات مخصوصى مرگ مغز مسلم شود زندگى او خاتمه یافته تلقى مى شود و ادامه موقت زندگى نباتى چنین فردى به کمک دستگاه تنفس مصنوعى و داروها میسر است و از اعضایى نظیر قلب و کبد این افراد براى پیوند به بیماران و نجات جان آنان استفاده مى شود. لطفاً نظر مبارک را در مورد انجام چنین اعمال جراحى و برداشتن اعضاى افراد با مرگ مسلم مغزى بیان فرمایید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : بر فرض مذکور چنان چه حیات انسان دیگرى متوقف بر این باشد, با اجازه صاحب قلب یا کبد و امثال آن جایز است.(1) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : اگر میّتى مشکوک باشد که مسلم است یا کافر و راهى براى حکم به اسلام او نباشد, تشریح آن جایز است یا خیر؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب :مانع ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : من یک شوهرى دارم که بینایى خود را از دست داده است, آیا مى توانم یک چشم خودم را به او تقدیم کنم؟ زیرا او دوست دارد در این انقلاب بزرگ نقشى داشته باشد و در راه انقلاب کوشش نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب :در فرض مرقوم جایز نیست. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : آیا برداشتن چشم از افراد متوفاى مجهول الهویّه که در کشور اسلامى در میان سردخانه هاى بیمارستان مدتى نگه دارى مى شوند و بازماندگان و اقوام آن ها به سراغ اجساد نمى آیند و پیوند زدن (قرنیه) قسمتى از چشم آن ها با چشم بیمارانى که نیاز به این نوع عمل جراحى دارند اشکال دارد یا خیر؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب :اگر کفر او احراز نشده جایز نیست. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : معمول است اشخاصى که کلیه ها یا سایر اعضاى آن ها فاسد مى شود, دیگرى, آن عضو از بدن خود را به آن شخص اعطا مى کند, آیا شرعاً شخص مى تواند یک کلیه یا یک چشم یا عضو دیگرى را که دو تا هست به دیگرى اعطا نماید یا خیر؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب :اگر حیات دیگرى منوط به آن باشد و خطر جانى متوجه اعطا کننده نشود اشکال ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : نظر به نیاز بیماران به پیوند اعضا, به خصوص کلیه, نظر حضرت عالى چیست؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب :اگر بیمار در خطر جانى باشد پیوند براى حفظ جان مسلمان مانع ندارد و تا از بدن غیرمسلمان ممکن است عضو مورد نیاز برداشته شود, از مسلمان جایز نیست. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : جراحى غددى که در بدن مى باشد و ضررى هم ندارد شرعاً چگونه است؟ جراحى بینى و یا گوش جهت زیبایى شرعاً چه حکمى دارد؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب :مانع ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : قطع عضوى از میّت جهت پیوند عضو به شخصى زنده در صورتى که میّت مسلمان باشد جایز نیست, مگر این که حیات شخص زنده متوقف بر آن باشد و امّا اگر حیات عضو او متوقف بر پیوند باشد ظاهراً جایز نمى باشد, پس اگر آن را قطع کند گناه کرده و بر او دیه مى باشد. این در صورتى است که قطع آن را اذن ندهد و اما اگر در آن اذن دهد در جواز آن اشکال است, لیکن بعد از اجازه دیه بر او نیست, اگر چه قائل به حرمت آن شویم و اگر میّت اذن نداده باشد, آیا اولیاى او حق دارند اجازه برداشت عضو بدهند یا نه؟ ظاهر آن است که چنین حقى ندارند, پس اگر به اذن اولیاى میت عضو او را قطع کند معصیت کرده و بر او دیه مى باشد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : قطع عضو میّت غیرمسلمان براى پیوند زدن مانعى ندارد, لیکن بعد از آن, اشکال در نجاست آن واقع مى شود و این که میته است و نماز در آن صحیح نیست و ممکن است گفته شود در جایى که حیات در آن حلول نماید از عضویت میت خارج مى شود و عضو زنده مى گردد, پس پاک و زنده مى شود و نماز در آن صحیح است, و هم چنین اگر عضوى از حیوان قطع شود ولو نجس العین باشد و پیوند شود, پس به حیات مسلمان زنده مى شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : اگر به جواز قطع و پیوند با اذن صاحب عضو در زمان حیاتش قائل شویم ظاهر آن است که بیع آن جایزمى باشد تا بعد از مرگش از آن استفاده شود, و اگر به جواز اذن اولیاى میت قائل شویم نیز جواز فروش آن جهت استفاده از آن بعید نیست. در این صورت باید ثمن را براى خود میّت خرج کرد و با آن یا دین او را ادا کرد و یا از طرف میت در خیرات مصرف کرد و وارث حقى در آن ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اگر حفظ جان مسلمانى موقوف باشد بر پیوند عضوى از اعضاى میّت مسلمانى, جایز است قطع آن عضو و پیوند آن و بعید نیست دیه داشته باشد و آیا دیه بر قطع کننده است یا بر مریض محل اشکال است, لکن طبیب مى تواند با مریض قرار دهد که او دیه را بدهد و اگر حفظ عضوى از مسلمان موقوف باشد بر قطع عضو میت در این صورت بعید نیست جایز نباشد و اگر قطع کند دیه دارد, لکن اگر میت در حال زندگى اجازه داد ظاهراً دیه ندارد, لکن جواز شرعى آن محل اشکال است و اگر خود او اجازه نداد, اولیاى او بعد از مرگش نمى توانند اجازه بدهند و دیه از قطع کننده ساقط نمى شود و معصیت کار است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : قطع عضو میّت غیرمسلمان براى پیوند, حرام نیست و دیه ندارد, لکن اگر پیوند کرد اشکال در نجاست آن و میته بودن آن براى نماز واقع مى شود, اگر میته انسانى در نماز اشکال داشته باشد. بنابراین اشکال در میته مسلمان نیز هست و اشکال نجاست اگر قبل از غسل قطع نمایند نیز هست, لکن مى توان گفت که اگر عضو میت پس از پیوند حیات پیدا کند از عضویت میّت مى افتد و به عضویت زنده در مى آید و نجس و میته نیست, بلکه اگر عضو حیوان نجس العین نیز پیوند شود و زنده به حیات انسان شود از عضویت حیوان خارج و به عضویت انسان در مى آید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اگر قطع عضو را بعد از مردن جایز دانستیم, بعید نیست که در حال حیات فروش آن جایز باشد و انسان بتواند اعضاى خودش را براى پیوند بفروشد در مواردى که قطع جایز است, بلکه جواز فروش تمام جسم براى تشریح در موردى که جایز است, خیلى بعید نیست, اگر چه بى اشکال نیست, لکن گرفتن مبلغى براى اجازه دادن در مورد جواز مانع ندارد.(2) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2. آیت اللّه محمدتقى بهجت&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : تعدادى از بیماران به دلیل ضایعات مغزى غیرقابل بازگشت و غیرقابل جبران, فعالیت هاى قشر مغز خود را از دست داده, در حالت اغماى کامل بوده و به تحریکات داخلى و خارجى پاسخ نمى دهند, ضمناً فعالیت هاى ساقه مغز خود را نیز از دست داده, فاقد تنفس و پاسخ به تحریکات متفاوت نورى و فیزیکى مى باشند. در این گونه موارد احتمال بازگشت فعالیت هاى مورد اشاره مطلقاً وجود نداشته, بیمار داراى ضربان خودکار قلب بوده که ادامه این ضربان هم موقتى و تنها به کمک دستگاه تنفس مصنوعى به مدت چند ساعت و حداکثر چند روز مقدور مى باشد. این وضعیت در اصطلاح پزشکى مرگ مغزى نامیده مى شود. از طرفى نجات جان عده دیگرى از بیماران منوط به استفاده از اعضاى مبتلایان به مرگ مغزى است. با عنایت به این که این اشخاص فاقد تنفس, شعور, احساس و حرکت ارادى هستند و هیچ گاه حیات خود را باز نمى یابند, مستدعى است ارشاد فرمایید (لطفاً با اشاره اجمالى به دلیل): &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;1ـ آیا در صورت احراز شرایط فوق مى توان از اعضاى مبتلایان به مرگ مغزى براى نجات جان بیماران دیگر استفاده کرد؟ آیا صرف ضرورت نجات جان مسلمانان نیازمند پیوند عضو براى جواز قطع عضو, کافى است یا اذن قبلى و وصیت صاحب عضو نیز لازم است؟ آیا اطرافیان میّت مى توانند پس از مرگ چنین اجازه اى بدهند؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;در صورت توقف حیات مریضهایى بر این کار, با احتیاط در استیذان از ورثه و استیذان از حاکم شرع, و تحقق موت حقیقى اشکال ندارد و صرف موت مغزى کفایت نمى کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2ـ آیا انسان مى تواند در زمان حیات خود با امضاى کارتى رضایت خود را براى برداشت اعضاى بدنش در صورت عارضه مرگ مغزى جهت پیوند به انسان هاى مسلمان نیازمند اعلام نماید؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;حکم در مورد مرگ مغزى گذشت که موت حقیقى و استیذان لازم است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3ـ آیا در موارد جواز قطع اعضا دیه ثابت است یا ساقط مى شود؟ در صورت ثبوت دیه, پرداخت آن برعهده کیست؟ پزشک یا بیمار؟ موارد مصرف دیه مذکور کدام است؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;در تقدیر جواز هم, دیه یا ارش ثابت است و دیه قطع اعضا میّت صرف در خیرات مى شود و بر کسى ثابت است که قطع کرده است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;q اگر شخصى بخواهد عضوى از اعضاى بدن خود; مثلاً کلیه را به دیگرى بدهد و یا وصیت کند که بعد از مردن خود, آن عضو در مقابل پول یا مجانى برداشته و به دیگرى داده شود, در صورتى که نجات مسلمانى متوقف بر آن عضو باشد; یعنى راه نجات آن مسلمان منحصر در دادن عضو به او باشد و تهیه آن از غیرمسلمان هم ممکن نباشد اشکالى ندارد.(3) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3. آیت اللّه میرزا جواد آقا تبریزى&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : تعدادى از بیماران به دلیل ضایعات مغزى غیرقابل بازگشت و غیرقابل جبران, فعالیت هاى قشر مغز خود را از دست داده, در حالت اغماى کامل بوده و به تحریکات داخلى و خارجى پاسخ نمى دهند, ضمناً فعالیت هاى ساقه مغز خود را نیز از دست داده, فاقد تنفس و پاسخ به تحریکات متفاوت نورى و فیزیکى مى باشند, در این گونه موارد احتمال بازگشت فعالیت هاى مورد اشاره مطلقاً وجود نداشته, بیمار داراى ضربان خودکار قلب بوده که ادامه این ضربان هم موقتى و تنها به کمک دستگاه تنفس مصنوعى به مدت چند ساعت و حداکثر چند روز مقدور مى باشد. این وضعیت در اصطلاح پزشکى مرگ مغزى نامیده مى شود. از طرفى نجات جان عده دیگرى از بیماران منوط به استفاده از اعضاى مبتلایان به مرگ مغزى است. با عنایت به این که این اشخاص فاقد تنفس, شعور, احساس و حرکت ارادى هستند و هیچ گاه حیات خود را باز نمى یابند, مستدعى است ارشاد فرمایید (لطفاً با اشاره اجمالى به دلیل): &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;1ـ آیا در صورت احراز شرایط فوق مى توان از اعضاى مبتلایان به مرگ مغزى براى نجات جان بیماران دیگر استفاده کرد؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2ـ آیا صرف ضرورت نجات جان مسلمانان نیازمند, پیوند عضو براى جواز قطع عضو, کافى است یا اذن قبلى و وصیت صاحب عضو نیز لازم است؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3ـ آیا اطرافیان میّت مى توانند پس از مرگ چنین اجازه اى بدهند؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4ـ آیا انسان مى تواند در زمان حیات خود با امضاى کارتى رضایت خود را براى برداشت اعضاى بدنش در صورت عارضه مرگ مغزى جهت پیوند به انسان هاى مسلمان نیازمند اعلام نماید؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;5ـ آیا در موارد جواز قطع اعضا دیه ثابت است یا ساقط مى شود؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;6ـ در صورت ثبوت دیه, پرداخت آن برعهده کیست؟ پزشک یا بیمار؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;7ـ موارد مصرف دیه مذکور کدام است؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;قطع اعضاى مسلمان مبتلا به مرگ مغزى و پیوند زدن آن به بدن شخص دیگر اشکال دارد و اذن صاحب عضو در زمان حیات و اعلام رضاى او اثرى در حکم ندارد, و وصیت به امر مزبور نافذ نیست و اولیاى میّت چنین حقى ندارند که اجازه قطع اعضاى او را بدهند و در صورت قطع اعضاى مبتلا به مرگ مغزى دیه آن بر قطع کننده است و به حسب سهام ارث بین ورثه میّت تقسیم مى شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : یرى الاطباء ان الموت یتحقق بموت القوة العاقلة, حتى لو کان القلب لم یتوقف تماماً عن النبض والحرکة ـ کما فى حالة ذبح الشاة مثلاً ـ امّا العرف المسامحى فیرى تحققه بتوقف القلب عن النبض و الخفقان والحرکة ومع کل ذلک فلو التفت العرف هذا الى ما یقوله الاطباء علمیاً کما فى المثال الآنف الذکر, فلربّما حکم بحکمهم, فبماذا یتحقق الموت؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : المیزان فى ترتب احکام الموت زهوق الروح و بقاء الانسان او الحیوان جسداً محضاً, و قد عین فى الروایات لذلک علامات و مجرّد موت القوة العاقلة لایوجب ترتب احکام المیت, واللّه العالم. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : فى حالة اثبات وفاة المریض طبیاً فهل یجوز اغلاق اجهزة التنّفس الصناعى الّتى توزّع الا وکسیجن فى جثة المتوفى؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : الموت الطبى لیس ملاکاً وانّما المعتبر الموت العرفى فلایجوز التعجیل فى اماتته, واللّه العالم. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : هل یجوز للطبیب اجراء عملیّة نقل کلیة من شخص الى آخر, اذا علم بانّ المتبرع قد تقاضى اجراً فى مقابل تبرّعه؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اذا جاز للشخص اعطاء کلیته, کما فى صورة الاضطرار, او کون المعطى کافراً, فلابأس, واللّه العالم. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : فى حالة وجود شخص میت و شخص آخر مریض, یواجه الموت سبب فشل فى احد اعضائه الرئیسیّه مثل القلب فهل یجوز او یجب نقل العضو المطلوب من المیت الى المریض؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : لایجوز ذلک الاّ اذا کان المیت غیر مسلم, واللّه العالم. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : فى ایّ سن یجوز للشخص التبرّع باحدى کلیته و هل یجوز لغیر البالغ التبرّع لاحد اقار به بموافقة ولیّ امره؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : التبرّع فیه اشکالٌ ولا یبعد عدم الجواز مطلقا, واللّه العالم.(4) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4. آیتاللّه سیدمحسن طباطبائى حکیم(1)&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;پیوند بعضى از اجزاى بدن میّت به بدن انسان زنده چنان چه ضرورت اقتضا کند, مانعى ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;اگر جزئى از اجزاى میته به ظاهر بدن انسان زنده وصل شود, چنان چه حیات در آن دمیده باشد جزء بدن انسان محسوب است و قبل از حلول حیات, چون مضطر است در حمل آن در حال نماز, احکام ضرورت بر آن جارى است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;اگر جزئى از حیوان نجس العین را, مانند روده سگ به روده انسان زنده وصل کنند در صورتى که بیمار مضطر به چنین عملى باشد مانعى ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جدا نمودن بعضى از اجزاى بدن مسلمان محتضر (یعنى کسى که در حال جان کندن است) و وصل آن به بدن انسان زنده, حرام است و دیه دارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;اگر کسى وصیت کند که پس از مرگ مثلاً چشم مرا جدا کنید و به دیگرى دهید عمل به وصیت عیبى ندارد, لکن ادعاى موصى له قبول نمى شود, مگر آن که از دعوى او علم حاصل شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;5. آیتاللّه خامنه اى&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : احتراماً معروض مى دارد تعدادى از بیماران به دلیل ضایعات مغزى غیرقابل بازگشت و غیرقابل جبران, فعالیت هاى قشر مغز خود را از دست داده, در حالت اغماى کامل بوده و به تحریکات داخلى و خارجى پاسخ نمى دهند, ضمناً فعالیت هاى ساقه مغز خود را نیز از دست داده, فاقد تنفس و پاسخ به تحریکات متفاوت نورى و فیزیکى مى باشند. در این گونه موارد احتمال بازگشت فعالیت هاى مورد اشاره مطلقاً وجود نداشته, بیمار داراى ضربان خودکار قلب بوده که ادامه این ضربان هم موقتى و تنها به کمک دستگاه تنفس مصنوعى به مدت چند ساعت و حداکثر چند روز مقدور مى باشد. این وضعیت در اصطلاح پزشکى مرگ مغزى نامیده مى شود. از طرفى نجات جان عده دیگرى از بیماران منوط به استفاده از اعضاى مبتلایان به مرگ مغزى است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;با عنایت به این که به طور خلاصه بیماران با مرگ مغزى فاقد تنفس, شعور, احساس و حرکت ارادى مى باشند و هیچ گاه حیات خود را باز نمى یابند, مستدعى است ارشاد فرمایید, آیا در صورت احراز شرایط فوق مى توان از اعضاى بیمار مبتلا به مرگ مغزى براى نجات جان بیماران دیگر استفاده نمود؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : در فرض سؤال, استفاده از اعضاى بدن موصوف, در صورتى که نجات نفس محترمه اى متوقف بر آن باشد, اشکال ندارد.(5) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : مستدعى است پاسخ چند سؤال فقهى زیر که در پزشکى مبتلا به مى باشد, مرقوم فرمایید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;امواجى که بر روى نوار ثبت مى شود دال بر فعالیت مغز یا قلب مى باشند با توجه به این که مى تواند امواج مغزى وجود نداشته باشد و قلب انسان با کمک دستگاه هاى مصنوعى فعالیت داشته باشد, سؤال این است که: &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;1ـ آیا نداشتن امواج مغزى دال بر مرگ است یا نداشتن امواج قلبى؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2ـ در حالت اغماى بدون برگشت که مغز به طور کلى مرده است و حرکات قلبى, عروقى و تنفسى به کمک دستگاه ها و داروها نگه دارى مى شود, بنابر این که پیوند اعضاى بدن مباح باشد, آیا جدا کردن عضوى مثل قلب از بدن شخص در این حالت براى پیوند به شخص دیگر جایز است؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3ـ آیا جدا کردن عضو در این حالت, جدا کردن عضو از انسان زنده محسوب مى شود یا از بدن مرده؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4ـ چه زمانى احکام میت مانند ارث,وصیت, عده وفات در مورد زوجه و ... بر او جارى مى شود؟ از زمان مرگ مغزى یا از زمان جدا کردن دستگاه هاى مذکور و توقف قلب؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;تشخیص مفهوم مرگ هم, مثل سایر موضوعات عرفیه با عرف است نه ملاحظه امواج فوق الذکر, و عرف تا حسّ و حرکتى در شخص باشد او را مرده نمى بیند; بلى جدا کردن عضو از انسان براى پیوند در مورد جواز, تابع صدق میّت نیست و اگر نجات نفس محترمه از مرگ موقوف باشد بر جدا کردن عضو در این حال و پیوند به او و با شرایط معتبره دیگر جایز است, هر چند احکام میّت از ارث و غیره در این حال مترتب نمى شود.(6) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : بیماران با مرگ مغزى فاقد تنفّس, شعور, احساس و حرکت ارادى هستند, ولى داراى ضربان خودکار قلب موقتى مى باشند, آیا مى توان از اعضاى این بیماران براى نجات جان سایر بیماران استفاده نمود؟ آیا اجازه قبلى بیمار یا اولیاى او شرط است؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اگر این کار در مردن او اثر ندارد, با اجازه قبلى خود بیمار یا اولیاى او اشکال ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : در صورتى که در اثر وقوع بیمارى لاعلاج و پیش رونده از نظر پزشکان مرگ حتمى قریب باشد, آیا مى توان از اعضاى بدن بیمار نظیر قلب, کلیه و کبد براى پیوند به بیماران و نجات جان آنان استفاده نمود؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اگر هنوز نمرده و قطع اعضاى مزبور بر زنده واقع مى شود اشکال دارد; بلى اگر عرفاً مرده به حساب آید با شرایط معتبره مانع ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : در صحنه جنگ مسلمانان با کفّار, در صورتى که حیات رزمنده مسلمان متوقف بر پیوند اعضا باشد, آیا مى توان اعضاى میّت غیرمسلمان را قطع و براى پیوند استفاده نمود؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;برفرض جواز آیا در این صورت دیه لازم است یا نه؟ و بر عهده بیمار است یا قطع کننده؟ آیا عضو پیوند شده براى نماز اشکال ایجاد نمى کند؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;قطع عضو میّت غیرمسلمان و پیوند آن مانع ندارد و دیه ندارد و پس از پیوند به مسلمان حکم عضو مسلمان را پیدا مى کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : بعضى از افراد براى کمک به درمان بیمارانى که نیاز به فرآورده هاى خونى یا اعضاى بدن دارند حاضر مى شوند که خون یا مثلاً کلیه یا چشم خود را بفروشند, این موضوع چه حکمى دارد؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اگر براى خود آن ها ضرر لازم المراعات نداشته باشد, مانع ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : خرید و فروش اعضا براى پیوند در این که عضو مورد اشاره یک کلیه یا یک چشم باشد فرقى نمى کند؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : فرقى ندارد, بلى جواز اعطاى کلیه در فرض توقّف حیات مؤمنى بر آن, بى اشکال است.(7) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : تزریق خون به دستور پزشک از زن به مرد یا بالعکس و یا از کافر به مسلمان چه حکمى دارد؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اشکال ندارد.(8) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : در صورتى که عضو یا اندام بیرونى, مانند دست و پاى فرد غیرهم جنسى را به کسى پیوند زنند آیا لمس آن قسمت توسط فرد اشکال دارد؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اگر عضو او شده لمس آن براى او مانع ندارد.(9) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : شخصى که اجازه تشریح و پیوند اعضاى بدن خود را نداده, آیا بعد از مرگش اولیاى او مى توانند اجازه بدهند؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اگر جدا کردن بعضى اعضا از بدن میّت موجب مثله یا هتک میّت نشود مانع ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : شخصى که وصیت به تشریح و پیوند اعضاى بدن خود را کرده; آیا بعد از(1) مرگش اولیاى او مى توانند اجازه چنین کارى را ندهند؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : احتیاط آن است که بدون اجازه عمل نکنند, مگر در موارد ضرورت لازم المراعات. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;6. آیت اللّه سید ابوالقاسم خوئى&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : کالبد شکافى که در ساعات آخر حیات پس از فوت مغزى, قبل از فوت قلبى, اعضایى از شخص را براى استفاده در علاج احیاء بر مى دارد با توجه به ضرورت علاج احیاء جایز است یا نه؟ و با وصیت قبلى خود شخص چه حکمى دارد؟ لطفاً اشاره اجمالى به دلیل. واین عمل براى کشف جرم با اذن اولیاى میّت جایز است یا نه؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : اصل عمل کالبد شکافى بدون ضرورت شرعیه جایز نیست و نیز برداشتن عضوى براى علاج زندگان بدون وصیت, ولى با وصیت صاحب جسد در حیات خود به هر مقدار که وصیت به آن واقع شد جایز است و وجه جواز, دفع منافات ناشى از لزوم احترام مسلم میّت آن مانند حیّ است با اذن مستفاد از وصیت.(10) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : آیا وصیت قبلى مسلمان در زمان حیات در مورد استفاده از بدن او براى تشریح یا استفاده از بعضى اعضاى او مانند کلیه, قلب و چشم اثرى در حکم جواز و رفع دیه دارد یا نه؟ (لطفاً با اشاره اجمالى به دلیل). &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : وصیت اثر در جواز و رفع دیه هر دو دارد, زیرا دو حکم نام برده به لحاظ احترام مسلم است و در فرض وصیت ارتکاب خلاف احترام او صورت نگرفته. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : خرید و فروش اعضاى آدم زنده براى پیوند; مانند یک کلیه و یک چشم و خون چه حکمى دارد؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : جایز است و مانعى ندارد, ولى اعضاى رئیسه مثل چشم را نمى توان فروخت. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : در مورد محکومین به اعدام در دادگاه شرع, آیا حاکم شرع مى تواند به لحاظ مصلحت تخفیف کیفر محکوم را موکول به اهداى عضوى براى نجات مسلمانى از مرگ نماید یا نه؟ البته مراد موارد حدود الهى است نه موارد قصاص هاى اشخاص؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : در صورتى که موجب حدّ آن محکوم به بیّنه ثابت شده قابل اسقاط و اعفا نیست و در صورتى که به اقرار او ثابت شده حاکم شرع مى تواند عفو کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : استفاده از باقیمانده زایمانى, مانند جفت و پرده جنین براى اعمال جراحى دیگران جایز است یا نه؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : جایز است و مانعى ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;سئوال : آیا جایز است از استخوان هاى مکشوفه در مقابر مسلمین براى تعلیم و تعلّم و احیاناً براى علاج احیا استفاده کرد؟ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;جواب : مانعى ندارد.(11) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;q جایز نیست بدن مرده مسلمان را تشریح کرد و اگر تشریح کنند برگردن تشریح کننده دیه لازم مى شود به طورى که تفصیل آن را در کتاب دیات بیان کرده ایم. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;q جایز است بدن مرده کافر را تشریح کرد به تمام انواع تشریح و همین طور است اگر مرده اى اسلام او مشکوک باشد و فرق نمى کند که تشریح بدن کافر یا مشکوک الاسلام در بلاد اسلامى بوده باشد یا غیر اسلامى. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;q اگر زنده ماندن یک مسلمانى متوقف باشد بر تشریح بدن مرده مسلمانى, و تشریح بدن غیرمسلمان, و یا مشکوک الاسلام ممکن نباشد و راه دیگرى براى زنده نگه داشتن آن مرد مسلمان نباشد, در این صورت جایز است که بدن مرده مسلمان را تشریح کنند و نسبت به لزوم پرداخت دیه در چنین صورتى در باب دیات ذکر شده است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;q جایز نیست بریدن عضوى از اعضاى بدن مرده مسلمان مانند چشم و یا عضو دیگر به منظور پیوند زدن آن عضو به بدن شخص زنده دیگر, و قطع کننده ملزم به پرداخت دیه آن عضو به ورثه مرده مى باشد, ولى چنان چه زنده ماندن فردى مسلمان متوقف بر بریدن عضو بدن مرده مسلمان و پیوند به شخص زنده گردد, جایز است بریدن آن عضو ولى قطع کننده باید دیه آن را بپردازد, و در هر دو صورت پیوند زدن عضو قطع شده به بدن دیگرى اشکال ندارد و پس از پیوند چون جزء بدن شخص زنده مى گردد, احکام بدن زنده بر او جارى است .... &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;و ظاهر این است که جایز باشد شخصى در حال حیات خود وصیت کند که پس از مردن او عضوى از اعضاى او را قطع کنند و به دیگرى پیوند زنند و در این صورت بریدن عضو آن میت دیه ندارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;q اگر شخصى راضى شود که در حال حیات خود عضوى از اعضاى او را بریده و به دیگرى پیوند زنند, چنان چه عضوى که به رضایت خود او بریده مى شود از اعضاى رئیسه باشد که بریدن آن صدمه اى به حیات او مى زند و یا نقص و عیبى در او ایجاد مى کند, بریدن آن عضو جایز نیست و اگر با بریدن آن عضو ضرر و عیبى بر او وارد نمى شود, مانند بریدن مقدارى از پوست و یا گوشت ران که جاى آن روییده مى شود, در این صورت بریدن آن عضو به رضایت خود او جایز است و مى تواند براى بریدن آن عضو مبلغى نیز دریافت کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;q جایز است تبرع کردن خون به بیمارانى که احتیاج به تزریق خون دارند و جایز است گرفتن مبلغى در مقابل دادن خون, ولى در هر دو صورت باید دادن خون براى صاحب آن ضرر جانى نداشته باشد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;q جایز است بریدن عضوى از بدن مرده کافر و یا مشکوک الاسلام به منظور پیوند آن به بدن شخص مسلمان و پس از پیوند چون جزء بدن مسلمان مى شود, احکام بدن مسلمان بر او جارى است و همین طور جایز است عضوى از اعضاى بدن حیوان نجس العین را به بدن شخص مسلمان پیوند زد و چون پس از پیوند جزء بدن مسلمان مى گردد احکام بدن مسلمان بر آن عضو جارى است و نماز خواندن با آن عضو نیز جایز است.(12) &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;</description>
<pubDate>Wed, 14 May 2008 19:44:36 +0430</pubDate>
<link>http://beheshtnet.parsibox.com/10.html</link>
<guid>http://beheshtnet.parsibox.com/10.html</guid>
<dc:creator>beheshtnet</dc:creator>
<category>12560</category>
</item>
<link>http://beheshtnet.parsibox.com</link>
<item>
<title>اساسنامه ديوان بين‌المللي دادگستري</title>
<description>&amp;nbsp; &lt;p style=&quot;line-height: 150%; text-align: center&quot; dir=&quot;rtl&quot; align=&quot;center&quot;&gt;اساسنامه دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 1- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری که به موجب منشور ملل متحد به عنوان رکن مهم قضایی سازمان تاسیس شده طبق مقررات این اساسنامه تشکیل یافته و انجام وظیفه خواهد نمود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;فصل اول - تشکیلات دیوان &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 2- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری عبارت است از یک هیات قضات مستقل که بدون توجه به ملیت آنها از میان کسانی انتخاب می&amp;zwnj;گردند که عالی&amp;zwnj;ترین مقام اخلاقی را دارا بوده و هریک واجد شرایطی باشند که برای انجام مشاغل عالی قضایی در کشور خود لازم است یا از جمله متبحرین در علم حقوق باشند که تخصص آنها در حقوق بین&amp;zwnj;المللی شهرت به سزایی دارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 3-1- دیوان مزبور مرکب است از پانزده عضو بدون اینکه در میان آنها بیش از یکنفر تبعه یک دولت باشد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- در این مورد کسی که ممکن است تبعه بیش از یک دولت محسوب گردد تبعه کشوری محسوب خواهد شد که معمولاً در آنجا حقوق مدنی و سیاسی خود را اعمال می&amp;zwnj;کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 4-1- اعضاء دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری را مجمع عمومی و شورای امنیت از میان اشخاصی که اسامی آنها به وسیله گروه&amp;zwnj;های ملی مربوط به دیوان دائمی داوری پیشنهاد می&amp;zwnj;گردند طبق مقررات زیر انتخاب می&amp;zwnj;نمایند: &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- در مورد اعضاء ملل متحد که در دیوان دائمی داوری نماینده ندارند داوطلبان به وسیله گروه&amp;zwnj;های ملی پیشنهاد خواهند شد که دولتهای آنها برای این منظور و طبق شرایطی که به موجب ماده 44 مقاوله&amp;zwnj;نامه لاه مورخ 1907 راجع به حل و فصل مسالمت&amp;zwnj;آمیز اختلافات بین&amp;zwnj;المللی برای اعضاء دیوان دائمی داوری مقرر است، معین می&amp;zwnj;گردند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- شرایطی که به موجب آن کشوری که طرف این اساسنامه است ولی عضو سازمان ملل متحد نیست می&amp;zwnj;تواند در انتخاب اعضاء دیوان شرکت کند در صورتیکه موافقتنامه مخصوص وجود نداشته باشد، توسط مجمع عمومی به توصیه شورای امنیت تعیین می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 5-1- سه ماه قبل از تاریخ انتخابات، دبیر کل سازمان ملل متحد اعضاء دیوان دائمی داوری را که تبعه دولتهای امضاء کننده این اساسنامه هستند همچنین اعضاء گروه&amp;zwnj;های ملی را که طبق فقره دوم ماده 4 معین شده&amp;zwnj;اند کتباً دعوت می&amp;zwnj;نماید تا در مدت معینی به معرفی اشخاصی که موقعیت اشغال مقام عضویت دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری را احراز می&amp;zwnj;کنند، مبادرت نمایند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- هیچ گروهی نمی&amp;zwnj;توان در هیچ مورد بیش از چهار نفر که حداکثر دونفر آنها از ملیت خود آن دسته باشد معرفی کند و در هیچ مورد ممکن نیست بیش از دوبرابر تعداد کرسی&amp;zwnj;های خالی نامزد نمود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 6- به هر گروه ملی توصیه می&amp;zwnj;شود که قبل از اقدام به تعیین داوطلبان با عالی&amp;zwnj;ترین دیوان قضایی، دستگاههای قضایی و از دانشکده&amp;zwnj;های حقوق و فرهنگستان&amp;zwnj;های ملی و شعبات ملی فرهنگستانهای بین&amp;zwnj;المللی که مخصوص مطالعات در علم حقوق هستند مشورت کنند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 7-1- دبیر کل صورتی از اسامی کسانی را که به این طریق معرفی شده&amp;zwnj;اند به ترتیب حروف الفبا تنظیم می&amp;zwnj;نماید. فقط این اشخاص قابل انتخاب خواهند بود مگر در موردی ه به موجب فقره دوم از ماده 12 پیش&amp;zwnj;بینی شده است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- دبیر کل این صورت را به اطلاع مجمع عمومی و شورای امنیت می&amp;zwnj;رساند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 8- مجمع عمومی و شورای امنیت هر یک مستقلاً اعضاء دیوان را انتخاب می&amp;zwnj;نمایند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 9- در هر انتخاب، انتخاب کنندگان باید در مد نظر داشته باشند اشخاصی که برای عضویت دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری معین می&amp;zwnj;شوند نهفقط باید شخصاً دارای شرایط مقرر باشند بلکه مجموعاً بتوانند نماینده اقسام بزرگ تمدنها و مهمترین نظام&amp;zwnj;های قضایی جهان نیز باشند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 10-1- کسانی منتخب محسوب می&amp;zwnj;گردند که هم در مجمع عمومی و هم در شورای امنیت دارای اکثریت تام بوده&amp;zwnj;اند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- در رای شورای امنیت خواه برای انتخاب قضات و خواه برای تعیین اعضاء کمیسیون مقرر در ماده 12 هیچ فرقی بین&amp;zwnj; اعضاء دائم و غیر دائم شورای امنیت گذاشته نخواهد شد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- هرگاه آراء مجمع عمومی و شورای امنیت به بیش از یکنفر از اتباع یک دولت داده شود فقط مسن&amp;zwnj;ترین آنها انتخاب می&amp;zwnj;گردد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 11- هرگاه پس از جلسه اول انتخابات باز کرسی&amp;zwnj;ها خالی باقی بماند به طریق مذکور به انتخابات دوم و در صورت لزوم به انتخابات سوم نیز مبادرت می&amp;zwnj;گردد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 12-1- هرگاه پس از سومین جلسه انتخابات بازکرسی&amp;zwnj;هایی خالی بمناند ممکن است در هر موقع خواه به درخواست مجمع عمومی و خواه به درخواست شورای امنیت کمیسیون مشترکی مرکز از شش عضو که ه نفر ا ز آنها را مجمع عمومی و سه نفر دیگر را شورای امنیت معین میکند تشکیل شود تا برای هر کرسی خالی اسم یکنفر را به اکثریت تام معین و آن را به منظور انتخاب جداگانه به مجمع عمومی و به شورای امنیت پیشنهاد کنند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- کمیسیون مشترک می&amp;zwnj;تواند اسم هر شخصی را که دارای شرایط مقرر بوده و حائز اتفاق آراء کمیسیون باشد در صورت اسامی منظور دارد ولو اینکه اسم آن شخص در صورت اسامی اشخاصی که به موجب ماده هفت معرفی شده&amp;zwnj;اند موجود نباشد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- هرگاه کمیسیون مشترک تشخیص دهد که نمی&amp;zwnj;تواند به تامین انتخاب موفق گردد اعضاء دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری که قبلاً معین شده&amp;zwnj;اند کرسی&amp;zwnj;های خالی را در مدتی که از طرف شورای امنیت معین می&amp;zwnj;شود و از میان اشخاصی که در مجمع عمومی و در شورای امنیت دارای رای بوده&amp;zwnj;اند پر می&amp;zwnj;کنند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4- هرگاه آراء قضات به طور مساوی تقسیم شود رای مسن&amp;zwnj;ترین آنها قاطع خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 13-1- اعضاء دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری برای مدت 9 سال انتخاب شده و قابل انتخابات مجدد نیز خواهند بود معذلک در مورد قضاتی که در انتخابات اول اعضاء دیوان معین می&amp;zwnj;گردند ماموریت 5 نفر از آنها در انقضای سه سال و ماموریت پنج نفر دیگر در آخر شش سال خاتمه پذیر می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- قضاتی را که ماموریت آنها باید د دوره مقدماتی سه سال و شش ساله خاتمه یابد دبیر کل ملل متحد فوراً پس از ختم اولین انتخابات به وسیله قرعه معین می&amp;zwnj;کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- اعضای دیوان مادام که جانشین آنها معین نشده است در شغل خود باقی خواهند بود و پس از تعیین جانشین نیز به کارهایی که قبلاً به آن رجوع شده است رسیدگی خواهند کرد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4- در صورت استعفای یکی از اعضای دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری آن استعفا به رئیس دیوان مزبور داده می&amp;zwnj;شود تا به دبیرکل ملل متحد ابلاغ گردد، به محض این ابلاغ کرسی عضو مستعفی خالی محسوب می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 14- پرکردن کرسی&amp;zwnj;های خالی با قید رعایت ترتیب ذیل به همان طریقی به عمل می&amp;zwnj;آید که برای انتخاب اولی مقرر است. دبیر کل ملل متحد باید در ظرف یکماه از تاریخ خالی شدن کرسی، دعوتی را که به موجب ماده 5 مقرر شده به عمل آورد و تاریخ انتخابات به وسیله شورای امنیت معین خواهد شد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 15- مدت ماموریت عضو منتخب به جای عضو دیگری که هنوز مدت ماموریت او تمام نشده است همان بقیه مدت سلف او خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 16-1- اعضای دیوان نمی&amp;zwnj;توانند هیچ ماموریت سیاسی یا اداری به عهده بگیرند یا به شغلی بپردازند که جنبه حرفه&amp;zwnj;ای داشته باشد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- در صورت تردید در این مورد حکم دیوان قطعی است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 17-1- اعضای دیوان نمیتوانند در هیچ کاری سمت نمایندگی یا مشاوره&amp;zwnj;ای یا وکالت داشته باشند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- آنها نمی&amp;zwnj;توانند در تسویه هیچ کاری که سابقاً در آن کار به سمت نمایندگی یا مشاورت یا وکالت یکی از طرفین یا به سمت عضویت یک محکمه ملی یا بین&amp;zwnj;المللی یا یک هیات تحقیقی یا به هر عنوان دیگری مداخله داشته&amp;zwnj;اند شرکت کنند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- در صورت تردید حکم دیوان قاطع خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 18-1- اعضای دیوان را نمی&amp;zwnj;توان از شغل خود منفصل نمود مگر در صورتیکه سایر اعضا متفقاً رای دهند که دیگر آن عضو واجد شرایط مقرر نیست: &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- دفتردار دیوان مراتب را رسماً به دبیرکل ملل متحد اطلاع می&amp;zwnj;دهد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- به محض این ابلاغ کرسی عضو منفصل، خالی محسوب می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 19- اعضای دیوان در اجرای وظایف خود دارای مزای ا و مصونیتای سیاسی خواهند بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 20- هر عضو دیوان باید قبل از تصدی شغل خود در جلسه علنی رسماً تعهد نماید که مشاغل خود را در کمال بیطرفی و از روی نهایت وجدان انجام خواهد داد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 21-1- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری رئیس و نایب رئیس خود را برای مدت سه سال معین می&amp;zwnj;نماد. تجدید انتخاب آنها جایز است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- دیوان دفتردار و هر کارمند دیگری را که لازم باشد معین می&amp;zwnj;نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 22-1- مقر دیوان مزبور می&amp;zwnj;تواند در صورتیکه لازم بداند در جای دیگری مستقر گردد و اجرای وظیفه نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- رئیس و دفتردار دیوان بین&amp;zwnj;المللی در مقر دیوان مقیم خواهند بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 23-1- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری همیشه در حال اشتغال خواهد بود مگر هنگام تعطیلات قضایی که اوقات و مدت آن را خود دیوان معین می&amp;zwnj;نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- اعضای دیوان حق گرفتن مرخص&amp;zwnj;های مرتب دارند تاریخ و مدت این مرخصی&amp;zwnj;ها را خود دیوان با در نظر گرفتن مسافت بین لاهه و خانه اصلی اعضا معین خواهد نمود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- جز در موارد مرخصی یا عدم امکان حضوربه علت ناخوشی یا به هر علت مهم دیگری که صحت آن را رئیس دیوان تشخیص می&amp;zwnj;دهد اعضای دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری باید همیشه تحت اختیار دیوان مزبور باشند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 24-1- هرگاه نظر به علت خاصی یکی از اعضای دیوان تشخیص دهد که نباید در رسیدگی به یک کار معینی شرکت نماید مراتب را به اطلاع رئیس می&amp;zwnj;رساند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- هرگاه در چنین مواردی بین رئیس و عضو دیوان اختلاف نظر باشد رای خود دیوان قاطع خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- در صورت عدم توافق میان اعضای دیوان و رئیس آن، حکم دادگاه قطعی است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 25-1- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری باید اختیارات خود را در جلسه علنی انجام دهد مگر اینکه به موجب این اساسنامه غیر از این تصریح شده باشد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- با قید اینکه عده قضات حاضر برای تشکیل دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری به کمتر از دوازده نرسد نظامنامه دیوان مزبور می&amp;zwnj;تواند مقرر دارد که یک یا چند نفر از قضات به نوبت و برحسب اوضاع ممکن است از شرکت در جلسات معاف گردند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- برای اینکه دیوان بتواند تشکیل گردد حد نصاب نه نفر کافی خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 26-1- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری می&amp;zwnj;تواند در هر موقع بنابه تشخیص خود یک یا چند شعبه که لااقل مرکب از سه نفر باشد تشکیل دهد تا به دعاوی از یک طبقه معین مثلاً به دعاوی راجع به کار و یا راجع به ترانزیت و ارتباطات رسیدگی نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- دیوان مزبور می&amp;zwnj;تواند در هر موقع برای رسیدگی به یک کار معین شعبه&amp;zwnj;ای تشکیل دهد. عده قضات این شعبه را خود دیوان با رضایت طرفین دعوی معین می&amp;zwnj;نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- شعبه&amp;zwnj;های مذکور در این ماده در صورتیکه طرفین تقاضا نمایند حکم خواهند داد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 27- هر حکمی که به وسیله شعبه&amp;zwnj;های مذکور در ماده 26 و 29 داده شود به منزله حکمی خواهد بود که خود دیوان داده باشد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 28- شعبه&amp;zwnj;های مذکور در ماده 26 و 29 می&amp;zwnj;توانند با رضایت طرفین در خارج از لاهه منعقد گشته و اجرای وظیفه نمایند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 29- به منظور پیشرفت سریع امور همه ساله دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری یک شعبه مرکز از پنج قاضی تشکیل خواهد داد تا در صورت درخواست طرفین رسیدگی اختصاری نماید. بعلاوه دونفر قاضی نیز معین خواهند شد تا جای هر قاضی را که نتواند در محاکمه شرکت کند بگیرند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 30-1- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری به موجب آئین&amp;zwnj;نامه طرف انجام وظایف و اختیارات و مخصوصاً آئین دادرسی خود را معین می&amp;zwnj;نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- آئین&amp;zwnj;نامه دیوان مزبور می&amp;zwnj;تواند وجود معاونینی را پیش بینی نماید که در خود دیوان یا در شعبه&amp;zwnj;های آن بدون داشتن حق رای حضور به هم رسانند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 31-1- قضاتی که ملیت هر یک از طرفین دعوی را دارند حق خواهند داشت در رسیدگی به دعوایی که در دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری مطرح است شرکت نمایند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- اگر در دیوان مزبور یک قاضی از ملیت یکی از طرفین دعوی باشد طرف دیگر می&amp;zwnj;تواند شخصی را به انتخاب خود معین نماید تا به عنوان قاضی در محاکمخ شرکت کند. این شخص باید حتی&amp;zwnj;الاکان از میان کسانی انتخاب گردد که طق ماده 4 و 5 معرفی شده&amp;zwnj;اند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- هرگاه در میان قضات دیوان هیچکس از ملیت طرفین دعوی وجود نداشته باشد هریک از آنها می&amp;zwnj;تواند یک نفر قاضی بطریقی در بند پیش مذکور است معین کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4- مفاد این ماده در مورد ماده 26 و 29 نیز رعایت خواهد شد. در این موارد رئیس دیوان از یک و در صورت لزوم از دو نفر از اعضاء دیوان که شعبه را تشکیل می&amp;zwnj;دهند تقاضا خواهد کرد که جای خود را به اعضایی که ملیت طرفین ذینفع را دارند واگذار کنند و اگر در میان اعضاء عضوی از ملیت طرفین دعوی نباشد یا در صورت بودن آن عضو نتواند در محاکمه شرکت کند جای خود را به قضاتی که طرفین دعوی مخصوصاً معین کرده&amp;zwnj;اند خواهند داد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;5- هرگاه در یک محاکمه چندین طرف منافع مشترک داشته باشند. تمام آنها از حیث اجرا مقررات فوق در حکم یک طرف خواهند بود. در صورت تردید حکم دیوان قاطع است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;6- قضاتی که به نحو مذکور در فقره 2 و 3 و 4 این ماده معن می&amp;zwnj;شوند باید مقررات ماده 2 و بند دوم از ماده 17 همچنین مقررات ماده 20 و 24 این اساسنامه درباره آنها رعایت گردد. قضات مزبور در پایه تساوی کامل با همقطاران خود در رای شرکت خواهند کرد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 32-1- اعضای دیوان مقرری سالیانه دریافت خواهند نمود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- به رئیس دیوان فوق&amp;zwnj;العاده مخصوص سالیانه پرداخت می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- نایت رئیس دیوان برای هر روزی که شغل ریاست را انجام می&amp;zwnj;دهد فوق&amp;zwnj;العاده مخصوص دریافت خواهد داشت. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4- قضات غیراز اعضای دیوان که به موجب ماده 31 معین می&amp;zwnj;شوند برای هر روز که انجام وظیفه می&amp;zwnj;نمایند حق&amp;zwnj;الزحمه&amp;zwnj;ای دریافت خواهند نمود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;5- مقرری و فوق&amp;zwnj;العاده و حق&amp;zwnj;الزحمه&amp;zwnj;های مذکور را مجمع عمومی معین می&amp;zwnj;نماید. میزان آنها را نمی&amp;zwnj;توان در مدت ماموریت قضات پایین آورد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;6- مقرری دفتردار را مجمع عمومی بنا به پیشنهاد دیوان تعیین خواهد کرد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;7- شرایطی را که به موجب آن درباره قضات دیوان بین&amp;zwnj;الملی دادگستری و دفتردار آن مبلغی به عنوان وظیفه برقرار می&amp;zwnj;گردد و همچنین شرایطی را که طبق آن باید مخارج سفر قضات و دفترداری به آنها مسترد گردد آئین&amp;zwnj;نامه&amp;zwnj;ای معین خواهد نمود ک به تصویب مجمع عمومی رسیده است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;8- مقرری و فوق&amp;zwnj;العاده و حق&amp;zwnj;الزحمه&amp;zwnj;ها از هرگونه مالیات معاف است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 33- مخارج دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری به نحوی که از طرف مجمع عمومی معین می&amp;zwnj;شود به عهده سازمان ملل متحد خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;فصل دوم &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;صلاحیت دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 34-1- فقط دولتها می&amp;zwnj;توانند به دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری رجوع کنند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- دیوان مزبور می&amp;zwnj;تواند طق شرایط مقرر در آئین&amp;zwnj;نامه خود در مورد دعاونی که به دیوان رجوع شده است از موسسه&amp;zwnj;های بین&amp;zwnj;المللی عمومی اطلاعات بخواهد و نیز اطلاعاتی را که این موسسات با ابتکار خود به دیوان می&amp;zwnj;دهند دریافت خواهد کرد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- هرگاه در ضمن دعوایی که به دیوان رجوع گردیده تفسیر سند تاسیس یک موسسه بین&amp;zwnj;المللی عمومی یا تفسیر قرارداد بین&amp;zwnj;المللی که به موجب آن سند قبول شده است مطرح گردد دفتر دیوان باید صورت جلسات کتبی محاکمه را به اطلاع آن موسسه برساند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 35-1- دولت&amp;zwnj;های امضاء کننده این اساسنامه حق روجوع به دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری را دارند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- شرایطی که به موجب آن سایر دولتها می&amp;zwnj;توانند با رعایت مقررات خاص عهدنامه&amp;zwnj;های جاری به دیوان مزبور رجوع کنند از طرف شورای امنیت معین خواهد شد بدون اینکه در هیچ مورد در آن شرایط برای طرفین دعوی یک عدم تساوی در مقابل دیوان تولید گردد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- هرگاه دولتی که عضو ملل متحد نیست طرف دعوی واقع گردد دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری سهمیه&amp;zwnj;ای را که باید آن دولت در مخارج دیوان متحمل گردد معین خواهد نمود معذلک اگر آن دولت در مخارج دیوان شرکت داشته باشد دیگر اجرای این حکم مورد نخواهد داشت. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 36-1- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری نسبت به کلیه اموری که طرفین دعوی به آن رجوع می&amp;zwnj;کنند و همچنین نسبت به موارد خاصی که به موجب منشور ملل متحد یا به موجب عهدنامه و قراردادهای جاری پیش&amp;zwnj;بینی شده است صلاحیت رسیدگی دارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- دولتهای امضاءکننده این اساسنامه می&amp;zwnj;توانند در هر موقع اعلام دارند که قضاوت اجباری دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری را نسبت به تمام اختلافاتی که جنبه قضایی داشته و مربوط به موضوعات ذیل باشد در مقابل هر دولت دیگری که این تعهد را متقبل گردد به خود خود و بدون قرارداد خاصی قبول می&amp;zwnj;نمایند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;الف- تفسر یک عهدنامه؛ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ب- هر مساله که موضوع حقوقی بین&amp;zwnj;المللی باشد؛ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ج- حقیقت هر امری که در صورت ثبوت، نقض یک تعهد بین&amp;zwnj;المللی محسوب می&amp;zwnj;گردد؛ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;د- نوع و میزان غرامتی که باید برای نقض یک تعهد بین&amp;zwnj;المللی داده شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- اعلامیه&amp;zwnj;های مذکور ممکن است بدون هیچ قید یا به شرط معامله متقابل با چند دولت یا با بعضی از آنها برای مدت معینی به عمل آید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4- این اعلامیه&amp;zwnj;ها به دبیر کل سازمان ملل متحد تسلیم می&amp;zwnj;گردند و ایشان رونوشت آن را به امضاء کنندگان این اساسنامه و همچنین به دفتر دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری ارسال می&amp;zwnj;دارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;5- اعلامیه&amp;zwnj;هایی که به موجب ماده 36 اساسنامه دیوان دائمی دادگستری بین&amp;zwnj;المللی صادر شده و هنوز معتبر است در روابط بین امضاء کنندگان این اساسنامه در حکم آن خواهد بود که قضاوت اجباری بین&amp;zwnj;المللی دادگستری برای بقیه مدت مذکور در آن اعلامیه&amp;zwnj;ها و بر طبق مقررات آنها قبول شده است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;7- در صورت اختلاف راجع به صلاحیت دیوان. حکم دوان قاطع است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 37- هرگاه به موجب یک عهدنامه یا قراردادی که هنوز معتبر است ارجاع اختلاف به هیات قضاتی پیش بینی شده باشد که بایستی از طرف جامعه ملل یا دیوان دائمی دادگستری بین&amp;zwnj;المللی تشکیل گردد نسبت به امضاء کنندگان این اساسنامه آن هیات قضات عبارت خواهد بود از دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 38-1- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری که ماموریت دارد اختلافاتی را که به آن رجوع می&amp;zwnj;شود بر طق حقوق بین&amp;zwnj;المللی حل و فصل نماید موازین زیر را اجرا خواهد کرد: &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;الف- عهدنامه&amp;zwnj;های بین&amp;zwnj;المللی را اعم از عمومی و خصوصی که به موجب آن قواعدی معین شده است که طرفین اختلاف آن قواعد را به رسمیت شناخته&amp;zwnj;اند؛ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ب- عرف بین&amp;zwnj;المللی به عنوان رویه&amp;zwnj;ای کلی که به صورت قانون پذیرفته شده است؛ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ج- اصول عمومی حقوقی که مقبول ملل متمدن است؛ &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;د- با رعایت حکم ماده 59 تصمیمات قضایی و عقاید برجسته&amp;zwnj;ترین مبلغین ملل مختلف به منزله وسائل فرعی برای تعیین قواعد حقوقی. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- مقررات این ماده حقی را که دیوان دادگستری بین&amp;zwnj;المللی دارد و به موجب آن می&amp;zwnj;تواند در صورت تقاضای طرفین درباره آنها به نحوی تساوی طبق قانون حکم دهد خللی وارد نمی&amp;zwnj;آورد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;فصل سوم - آئین دادرسی &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 39-1- زبانهای رسمی دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری فرانسه و انگلیسی است. هرگاه طرفین دعوی موافقت نمایند که تمام جریان کار به زبان فرانسه به عمل آید حکم نیز به زبان فرانسه امضاء خواهد شد. هرگاه طرفین دعوی توافق نمایند که تمام جریان کار به زبان انگلیسی به عمل آید حکم نیز به زبان انگلیسی داده می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- در صورت نبودن موافقتی برای تعیین زبانی که باید به کار گرفته شود طرفین دعوی می&amp;zwnj;توانند در تقریرات خود هر یک از این دو زبان را که ترجیح می&amp;zwnj;دهند به کار برند و حکم دیوان نیز به فرانسه و انگلیسی داده خواهد شد. در این صورت خود دیوان معین می&amp;zwnj;کند که کدام یک از این دو نص معتبر خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- دیوان به درخواست هرطرفی اجازه خواهد داد که آن طرف زبانی غیر از فرانسه یا انگلیسی به کار برد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 40-1- دعاوی به اقتضای مورد یا به وسیله ابلاغ توافق طرفین دعوی یا به وسیله دادخواستی که به دفتردار داده می&amp;zwnj;شود به دیوان رجوع می&amp;zwnj;گردد. در هر صورت باید موضوع اختلاف و طرفین دعوی معین گردند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- دفتردار فوراً عرض حال را به هر ذینفعی ابلاغ می&amp;zwnj;کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- و نیز نامبرده موضوع را به وسیله دبیرکل سازمان ملل متحد به اطلاع اعضای ملل متحد و همچنین به اطلاع دولتهایی که حق رجوع به دیوان دارند می&amp;zwnj;رساند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 41-1- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری اختیار دارد در صورتی که تشخیص دهد که اوضاع و احوال ایجاب می&amp;zwnj;کند اقداماتی را که باید برای حفظ حقوق طرفین موقتاً به عمل آید انجام دهد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- تا صدور حکم قطعی تعیین این اقدامات باید فوراً به طرفین اختلاف و به شورای امنیت ابلاغ گردد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 42-1- نمایندگی طرفین در دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری به عهده کسانی است که از طرف آنها معین می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- طرفین می&amp;zwnj;توانند در محضر دیوان از مشاورین حقوقی یا وکلای دادگستری کمک بگیرند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- نمایندگان و مشاوران و وکلای طرفین در محضر دیوان دارای مزایا و مصونیتهایی خواهند بود که برای انجام آزادانه وظایف آنها لازم است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 43-1- آئین رسیدگی دو مرحله دارد یک کتبی و دیگری شفاهی. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- آئین کتبی عبارت است از ابلاغ لوایح متقابل و بنابر اقتضی جواب آنها به قاضی و به طرف وهمچنین از ابلاغ اوراق و مدارک مربوط به دعوی. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- ابلاغ به وسیله دفتردار و به ترتیب در مدتی که از طرف دیوان معین می&amp;zwnj;شود به عمل می&amp;zwnj;آید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4- رونوشت مصدق هرگونه اوراق که یکی از طرفین می&amp;zwnj;دهد باید به طرف دیگر ابلاغ شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;5- آئین شفاهی عبارت است از استماع به اظهارات شهود و کارشناسان و نمایندگان و مشاورین حقوق وکلای دعوی. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 44-1- برای ابلاغ به هر کسی غیر از نمایندگان و مشاوران و وکلای طرفین دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری مستقیماً به دولتی مراجعه خواهد کرد که ابلاغ در خاک آن دولت می&amp;zwnj;بایسیتی تسلیم شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- همین ترتیب در مواردی که بایستی مدارکی در مح مجمع&amp;zwnj;آوری شود نیز صدق می&amp;zwnj;کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 45- رسیدگی تحت ریاست رئیس و در صورت غیبت او تحت ریاست نایت رئیس به عمل می&amp;zwnj;آید. در صورت غیبت هر دو ریاست به عهده قدیمی&amp;zwnj;ترین قاضی از میان قضات حاضر خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 46- جلسه رسیدگی علنی است مگر اینکه خود دیوان تصمیم دیگری بگیرد یا اینکه طرفین درخواست نمایند که جلسه بدون حضور تماشاچی تشکیل شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 47-1- در هر جلسه صورت جلسه&amp;zwnj;ای تهیه خواهد شد که به امضای رئیس و دفتردار می&amp;zwnj;رسد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- فقط این صورت جلسه اعتبار سند رسمی خواهد داشت. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 48- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری برای اداره کردن جریان دعوی و تعیین ترتیبات و مهلت&amp;zwnj;هایی که باید هر یک از طرفین بر طبق آن آخرین تقاضای خود را از دیوان بنامیند قرارهایی صادر و هر اقدامی را که برای اقامه ادله مقتضی باشد به عمل می&amp;zwnj;آورد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 49- دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری می&amp;zwnj;تواند حتی قبل از شروع جلسه از نمایندگان طرفین بخواهد که تمام مدارک را تقدیم و کلیه توضیحات خود را بدهند. در صورت امتناع این نکته را دیوان منظور نظر خواهد داشت. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 50- دیوان می&amp;zwnj;تواند هرگاه لازم باشد یک تحقیق یا یک امر مشورتی را به هر شخص یا هیات یا دفتر یا کمیسیون و یا موسسه&amp;zwnj;ای که خود دیوان انتخاب می&amp;zwnj;کند رجوع نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 51- در جریان محاکمه کلیه سوالات مقتضی از شهود و کارشناسان بر طبق ترتیباتی به عمل می&amp;zwnj;آید که دیوان بین&amp;zwnj;المللی دادگستری در آئین&amp;zwnj;نامه مذکور در ماده 30 مقرر خواهد داشت. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 52- پس از آنکه در تاریخ&amp;zwnj;های مقرر اسناد و مدارک دریافت و اظهارات شهود استماع گردید دیوان می&amp;zwnj;تواند هر شهادت یا مدارک جدیدی را که یکی از طرفین بخواهد بدون رضایت طرف دیگر به او بدهد رد نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 53-1- اگر یکی از طرفین در جلسه رسیدگی حاضر نشود یا از ابراز دلایل خودداری نماید طرف دیگر می&amp;zwnj;تواند از دیوان تقاضا نماید که بر طبق درخواست&amp;zwnj;های او حکم بدهد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- قبل از اینکه دیوان این تقاضا را بپذیرد باید مطمئن گردد که نه فقط طبق ماده 36 و 37 صلاحیت رسیدگی دارد بلکه درخواست&amp;zwnj;های مزبور هم از نقطه نظر حقوقی و هم از نقطه نظر عملی صحیح و با اساس است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 54-1- وقتی که نمایندگان و مشاورین و وکلای طرفین تمام وسائلی را که مفی می&amp;zwnj;دانند تحت نظر دیوان به کار بردند رئیس ختم محاکمه را اعلام می&amp;zwnj;نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- سپس هیات داوران برای مشورت به اتاق مشاوره می رود. مشاوره داوران باید محرمانه به عمل آمده و سری بماند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 55-1- احکام داوران با اکثریت قضات حاضر صادر می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- در صورت تساوی آراء، رای رئیس یا کسی که جانشین او است قاطع خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 56-1- حکم باید موجه باشد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- اسامی قضاتی که در صدور حکم شرکت کرده&amp;zwnj;اند باید در حکم قید گردد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 57- هرگاه حکم کالاً یا جزاً به اتفاق آراء قضات صادر نشده باشد هر قاضی حق خواهد داشت شرح عقیده شخصی خود را صمیمه حکم کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 58- حکم باید به امضای رئیس و دفتردار برسد و در جلسه علنی که نمایندگان طرف حسب&amp;zwnj;المقرر به آنجا دعوت شده باشند خوانده می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 59- احکام دیوان فقط درباره طرفین اختلاف و در موردی که موضوع حکم بوده الزام&amp;zwnj;آور است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 60- احکام دیوان قطعی و غیر قابل استیناف است. در صورت اختلاف در مورد معنی و حدود حکم، دیوان می&amp;zwnj;تواند به درخواست هر طرفی آن را تفسیر نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 61-1- تجدید نظر در حکم را نمی&amp;zwnj;توان از دیوان تقاضا نمود مگر در صورت کشف یک امری که در قضیه اثر قطعی داشته و قبل از صدور حکم، خود دیوان و طرفی که تقاضای تجدید نظر می&amp;zwnj;نماید از وجود آن امر اطلاع نداشته&amp;zwnj;اند و از ناحیه طرف مزبور هم تقصیری برای این عدم اطلاع نبوده است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- آئین تجدید نطر بر طبق حکمی شروع می&amp;zwnj;شود که از طرف دیوان صادر شده و به موجب آن صراحتاً وجود امر جدیدی را که دارای کیفیات لازم برای امکان تجدید نظر است اشهاد کرده و از این حیث درخواست تجدید نظر را قابل قبول اعلام می&amp;zwnj;دارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- دیوان می&amp;zwnj;تواند شروع آئین تجدید نظر را به اجرای قبلی حکم متوقف سازد &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4- درخواست تجدید نظر باید حداکثر در ظرف 6 ماده از تاریخ کشف امر جدید به عمل آید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;5- پس از انقضای ده سال از تاریخ حکم هیچ درخواست تجدید نظر امکان&amp;zwnj;پذیر نخواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 62-1- هرگاه دولتی تشخیص دهد که قضاوتی که به عمل آمده به یکی از علایق حقوقی آن مربوط می&amp;zwnj;شود می&amp;zwnj;توان برای دخالت در قضیه به دیوان عرض حال بدهد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- در مورد این تقاضا رای دیوان قاطع است. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 63-1- هرگاه امر مربوط به تفسیر قراردادی باشد که در آن قرارداد دولتهای دیگر غیر از طرفین اختلاف شرکت داشته&amp;zwnj;اند. دفتردار باید بدون درنگ مراتب را به اطلاع آن دولتها برساند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- هر یک از این دولتها حق دارد که وارد محاکمه شود و در صورت اعمال این حق تفسیری که به موجب حکم دیوان به عمل می&amp;zwnj;آید درباره او نیز الزام&amp;zwnj;آور خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 64- هریک از طرفین دعوی مخارج محاکمه مربوط به خود را متحمل خواهد شد مگر اینمه دیوان ترتیب دیگری مقرر دارد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;فصل چهارم - آراء مشورتی &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 65-1- دیوان می&amp;zwnj;تواند در هر مسئله قضایی به تقاضای هر سازمان یا موسسه&amp;zwnj;ای که منشور ملل متحد به او اجازه چنین تقاضا را می&amp;zwnj;دهد یا برطبق مقررات آن منشور می&amp;zwnj;تواند این اقدام را به عمل آورد رای مشورتی بدهد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- مسائلی که در مورد آن رای مشورتی دیوان خواسته می&amp;zwnj;شود باید ضمن عرض حال کتبی بیان و در عرض حال مزبور آن مسائل باید با عبارت صریح شرح داده شود. هر نوع مدارکی که ممکن است موجب روشن کردن مساله باشد باید به عرض حال ضمیمه گردد. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 66-1- دفتر دار فوراً عرض حالی را که به موجب آن درخواست رای مشورتی به عمل آمده به تمام دولتهایی که حق اقامه دعوی در دیوان دارند ابلاغ می&amp;zwnj;نماید. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;2- بعلاوه دفتردار باید به موجب ابلاغ مخصوص و مستقیم به هر دولتی که حق اقامه دعوی در دیوان یا یک سازمان بین&amp;zwnj;المللی که به تشخیص دیوان یا در صورتیکه دیوان به تشخیص فرد توانایی دادن اطلاعات لازم را داشته باشد اطلاع دهد که دیوان حاضر است در مورد موعدی که رئیس معین می&amp;zwnj;نماید اظهاریه&amp;zwnj;های کتبی دریافت یا بیانات شفاهی آنها را در جلسه علنی که برای این منظور تشکیل می&amp;zwnj;یابد استماع کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;3- هرگاه یکی از این دولتها که ابلاغ مخصوص منظور در بند دوم این ماده نسبت به او به عمل نیامده است به دادن اظهاریه کتبی یا به بیان توضیحات شفاهی اظهار میل کند در مورد این تقاضا رای دیوان قاطع خواهد بود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;4- به دولتها یا موسسه&amp;zwnj;هایی که لوایح کتبی یا توضیحات شفاهی داده&amp;zwnj;اند اجازه داده می&amp;zwnj;شود که لوایح و توضیحات دولتها با سازمانهای دیگر را به طریق و در مدتی که در هر مورد بخصوص از طرف دیوان در صورت دایر نبودن آن از طرف رئیس معین می&amp;zwnj;شود مورد بحث و اطهار نظر قرار دهند و برای این منظور دفتردار در مورد مقتضی اظهاریه&amp;zwnj;های کتبی را به دولتها و موسساتی که خود آنها نیز اظهاریه&amp;zwnj;هایی تقدیم داشته&amp;zwnj;اند ارسال می&amp;zwnj;دارند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 67- دیوان رای مشورتی خود را در جلسه علنی اعلام می&amp;zwnj;دارد و مراتب قبلاً به دبیرکل و نمایندگان اعضاء سازمان ملل متحد و دولتهای دیگر و به نمایندگان موسسات بین&amp;zwnj;المللی که مستقیماً ذینفع هستند اطلاع داده می&amp;zwnj;شود. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 68- دیوان باید در حین اجرای وظایف مشورتی خود مقررات این اساسنامه را در مورد اختلافات مطروحه&amp;zwnj;ای که قابل اعمال می&amp;zwnj;داند تا سرح امکان مراعات کند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;فصل پنجم - اصلاحات &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 69- اصلاحات این اساسنامه به همان طریقی به عمل می&amp;zwnj;آید که برای اصلاحات منشور ملل متحد مقرر است ولی مشروط و منوط به تصمیماتی خواهد بود که مجمع عمومی بنابه توصیه شورای امنیت برای شرکت دولتهایی اتخاذ می&amp;zwnj;نماید که این اساسنامه را امضاء کرده&amp;zwnj;اند ولی عضو سازمان ملل متحد نیستند. &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده 70- دیوان می&amp;zwnj;تواند اصلاحاتی را که به تشخیص او لازم است در این اساسنامه به عمل آید به وسیله ابلاغ کتبی دبیر کل سازمان ملل متحد پیشنهاد نماید تا طبق مقررات ماده 69 مورد رسیدگی واقع شود.&lt;/p&gt;</description>
<pubDate>Wed, 14 May 2008 19:43:43 +0430</pubDate>
<link>http://beheshtnet.parsibox.com/9.html</link>
<guid>http://beheshtnet.parsibox.com/9.html</guid>
<dc:creator>beheshtnet</dc:creator>
<category>12560</category>
</item>
<link>http://beheshtnet.parsibox.com</link>
<item>
<title>اساسنامه اتحاديه بين المللي وكلا</title>
<description>&amp;nbsp; &lt;p style=&quot;line-height: 150%; text-align: center&quot; dir=&quot;rtl&quot; align=&quot;center&quot;&gt;اساسنامه اتحادیه بین المللی وکلا&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده ۱ . نام &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;اتحادیه بین المللی وکلا که اختصاراً &amp;laquo; یو . آی . ای &amp;raquo; یا &amp;laquo; یویا &amp;raquo; نامیده میشود در هشتم ژوئیه ۱۹۲۷ در شارل روا طبق قانون اکتبر ۱۹۱۹ بلژیک و با اختیار حاصل از آن و به موجب این اساسنامه تاسیس گردیده است . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;این اساسنامه به چندین زبان رسمی مورد استفاده در اتحادیه ترجمه شده است لکن در مواردی که تفسیر مواد آن دشوار باشد ، متن فرانسه ، نسخة اصلی و معتبر محسوب خواهد گردید . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده ۲ . جهان شمولی &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;اتحادیة بین المللی وکلا با متحد کردن کانونهای وکلا و حقوقدانان و نهادهای تخصصی آنا ن در سراسر جهان و ضمن توجه و احترام به تنوع نظامهای حقوقی و فرهنگهای موجود ، بر ماهیت جهانی خود تصریح میکند . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;ماده ۳ . اهداف &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;اهداف اتحادیه بین المللی وکلا بدون در نظر گرفتن ملاحظات سیاسی و عقیدتی به شرح ذیل است : &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;۳ . ۱ . ۱ ـ ارتقای مبانی اساسی حرفة وکالت در سراسر جهان بویژه اصل استقلال و آزادی وکلا در راستای منافع کلیه کسانی که در نظام قضائی فعالیت میکنند و به شرحی که در منشورهای مصوب اتحادیه بین المللی وکلا تعریف گردیده است . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;۳ . ۱ . ۲ ـ گسترش و ترویج علم حقوق در تمامی زمینه ها . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;۳ . ۱ . ۳ ـ کمک به ایجاد یک نظم قضائی بین المللی بر پایه اصل عدل در میان ملل از طریق قانون و به منظور برقراری صلح . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;۳ . ۱ . ۴ ـ بدین منظور، همکاری با سازمانهای ملی و بین المللی مشترک المنافع یا سازمانهایی که نیل به این اهداف را تسهیل میکنند . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;۳ . ۱ . ۵ ـ پشتیبانی از ایجاد ارتباط و تبادل مداوم در سطح بین المللی بین کانونهای وکلا یا انجمنهای ملی یا فدراسیونهای وکلا و اعضای آنها و حمایت از فعالیتهای آنان و مشارکت در این گونه فعالیتها . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;۳ . ۱ . ۶ ـ آمادگی برای نمایندگی دائمی اتحادیه بین المللی وکلا در سازمانهای دولتی و غیر دولتی بین المللی . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;۳ . ۱ . ۷ ـ دفاع از حقوق مادی و معنوی اعضای حرفه و بررسی مشترک مسائل مربوط به سازمان و جایگاه حرفهای آن در سطح بین المللی . &lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;line-height: 150%&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;۳ . ۲ ـ 